मानवता कभी हंसी-सी दिखती है कभी यह मुस्कान-सी दिखती है चेहरे के नूर में दिखती है अहंकार …
मानवता मानव का वस्त्र उसी तरह है जैसे सूरज के लिए सवेरा है चांद के लिए चांदनी है । मा…